
मथुरा प्रवेश तथा कंस बध
धनुषसाला चले नँदलाला |
सखा लिए संग प्रभु रंग नाना करत, देव नर कोउ न लखि सकत ख्याला ||
नृपति के रजक सौं भेंट मग मैं भई, कह्यौ दै बसन हम पहिरि जाहीं |
बसन ये नृपति के जासु प्रजा तुम, ये बचन कहत मन डरत नाहीं ||
एक ही मुष्टिका प्रान ताके गए, लए सब बसन कछु सखनि दीन्हे |
आइ दरजी गयौ बोलि ताकौं लयौ, सुभग अँग साजि उन विनय कीन्हे ||
पुनि सुदामा कह्यौ गेह मम अति निकट, कृपा करि तहाँ हरि चरन धारे |
धोइ पद-कमल पुनि हार आगैं धरे, भक्ति दै, तासु सब काज सारे ||
लिए चंदन बहुरि आनि कुबिजा मिली, स्याम अँग लेप कीन्हौ बनाई ||
रीझि तिहिं रूप दियौ, अंग सुधौ कियौ, बचन सुभ भाषि निज गृह पठाई |
पुनि गए तहाँ जहँ धनुष, बोले सुभट हौंस, जनि मन करौ बन-बिहारी |
सूर प्रभु छुवत धनु टूटि धरनी पर्यौ, सोर सुनि कंस भयौ भ्रमित भारी ||21||
Bihar became the first state in India to have separate web page for every city and village in the state on its website www.brandbihar.com (Now www.brandbharat.com)
See the record in Limca Book of Records 2012 on Page No. 217