
राग सारंग
हलधर सौं कहि ग्वालि सुनायौ |
प्रातहि तैं तुम्हरौ लघु भैया, जसुमति ऊखल बाँधि लगायौ ||
काहू के लरिकहि हरि मार्यौ, भोरहि आनि तिनहिं गुहरायौ |
तबही तैं बाँधे हरि बैठे, सो तुमकौं आनि जनायौ ||
हम बरजी बरज्यौ नहिं मानति, सुनतहिं बल आतुर ह्वै धायौ |
सूर स्याम बैठे ऊखल लगि, माता उर-तनु अतिहिं त्रसायौ ||
भावार्थ :-- (किसी) गोपीने श्रीबलराम से यह बात कह सुनायी है | श्यामने किसीके
लड़केको मारा था, सबेरे ही आकर उसने पुकार की, तभीसे मोहन बँधे बैठे हैं - यह
बात हमने आकर तुम्हें बता दी | हमने तो बहुत रोका, किंतु (व्रजरानी) हमारा रोकना
मानती नहीं हैं |' यह सुनते ही बलरामजी आतुरतापूर्वक दौड़ पड़े | सूरदासजी कहते हैं
(उन्होंने देखा) कि श्यामसुन्दर ऊखलसे सटे बैठे हैं, माताने उनके शरीरको अत्यन्त
पीड़ित तथा हृदयको बहुत भयभीत कर दिया है |
Bihar became the first state in India to have separate web page for every city and village in the state on its website www.brandbihar.com (Now www.brandbharat.com)
See the record in Limca Book of Records 2012 on Page No. 217