
मुख-छबि कहा कहौं बनाइ |
निरखि निसि-पति बदन-सोभा, गयौ गगन दुराइ ||
अमृत अलि मनु पिवन आए, आइ रहे लुभाइ |
निकसि सर तैं मीन मानौ,, लरत कीर छुराइ ||
कनक-कुंडल स्रवन बिभ्रम कुमुद निसि सकुचाइ|
सूर हरि की निरखि सोभा कोटि काम लजाइ ||
भावार्थ :-- इस मुख की शोभाका क्या बनाकर (उपमा देकर) वर्णन करूँ | इसकी
छटाको देखकर चन्द्रमा (लज्जासे) आकाशमें छिप गया है | (अलकें ऐसी लगती हैं मानो)
भौरों का झुंड अमृत पीने आया था और आकर लुब्ध हो रहा है | (नेत्रोंके मध्यमें
नासिका ऐसी है मानो) सरोवर से निकलकर दो मछलियाँ लड़ रही थीं, एक तोता उन्हें
अलग करने बीचमें आ बैठा है | कानोंमें सोनेके कुण्डलोंकी शोभाको देखकर रात्रिमें
फूलनेवाले कुमुदके पुष्प भी संकुचित होते हैं | सूरदासजी कहते हैं कि श्यामसुन्दरकी
शोभा देखकर करोड़ों कामदेव लज्जित हो रहे हैं |
Bihar became the first state in India to have separate web page for every city and village in the state on its website www.brandbihar.com (Now www.brandbharat.com)
See the record in Limca Book of Records 2012 on Page No. 217